विश्व सामाजिक मंच का 16वां सम्मेलन काठमांडू नेपाल में 15 फरवरी 2024 से शुरू होकर 19 फरवरी 2024 को समाप्त को गया। “एक और दुनिया संभव है” बैनर के तहत आयोजित पांच दिवसीय डब्ल्यू एस एफ 2024 का उद्देश्य नवउदारवादी वैश्वीकरण का विरोध करने वाले नागरिक, समाज संगठनों, सामाजिक आंदोलनों, ट्रेड यूनियनों और व्यक्तियों के बीच क्षैतिज आदान-प्रदान को खोलना था। यह कार्यक्रम भृकुटीमंडप मुख्य आयोजन स्थल से एक एकजुटता मार्च के साथ शुरू हुआ और भद्रकाली, न्यू रोड गेट, रत्ना पार्क और वापस भृकुटीमंडप से गुजरा। मार्च में भाग लेने वाले न्याय, शांति, समानता और भेदभाव को समाप्त करने के समर्थन में लिखे नारे, बैनर और तख्तियां लिए हुए थे। विभिन्न क्षेत्रों और अधिकारों से जुड़े विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने मार्च में अपनी एकजुटता व्यक्त की। 92 देशों के लगभग चालीस हजार लोगों ने यहाँ अपनी उपस्थिति दर्ज की। उद्घाटन समारोह के बाद विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं की एक पैनल चर्चा हुई।

काठमांडू, नेपाल में आयोजित इन पाँच दिनों में विभिन्न कार्यशालाओं में विश्व स्तर पर मानव को प्रभावित करने वाले कई ज्वलंत समस्याओं पर गहन चर्चा हुई। अलग-अलग विषयों पर आयोजित चर्चाओं में मुख्य रूप से आर्थिक असमानता, जलवायु परिवर्तन, न्याय, श्रम, प्रवासन, जातिगत भेदभाव, लैंगिक असमानता, शांति, सतत विकास, जल जंगल जमीन, फिलिस्तीन आंदोलन का समर्थन, जेंडर, ट्रांसजेंडर के मुद्दे, जन आंदोलन की रणनीति और उनका समर्थन के अलावा भी अन्य कई गंभीर विषय थे। चर्चा मुख्य रूप से इस बात पर केन्द्रित थी कि नवउदारवादी वैश्वीकरण को चुनौती देने और बढ़ावा देने वाले संवाद और कार्यों में कैसे भाग लिया जा सके, ताकि एक अधिक न्यायसंगत, टिकाऊ और न्यायपूर्ण दुनिया का नव निर्माण हो। दुनिया भर में हो रहे मानव मूल्यों के खिलाफ की गतिविधियों की राजनीति को समझा जा सके। काठमांडू, नेपाल के भृकुटीमंडप के परिसर में बने मंच से जब बिहार इप्टा के साथियों ने अपने क्रांतिकारी गीत को स्वर दिया, कई आवाज उनकी आवाज में शामिल हो गए और पूरा परिसर ही गीतों के बोल से गूंजने लगा, उसकी धुन पर थिरकने लगा।



इस वृहत मंच से जब भारत के साथ-साथ अन्य देशों जैसे- पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, चीन, फ्रांस, जर्मनी, जापान, फिलीपींस, स्पेन, फिलिस्तीन, क्यूबा, ट्यूनीशिया, आदि से आए प्रतिनिधियों ने अपने देशों की समस्याओं को जोड़दार शब्दों में बयान करना शुरू किया तो एक संवेदना की लहर सी दौड़ गई, जिसने सभी को आपस में जोड़ दिया। एक बड़ा प्रतिनिधि मंडल फिलिस्तीनीयों का था, जो इस विश्व सामाजिक मंच से वर्तमान में इजराइलियों द्वारा गाजा पर हो रहे विध्वंसक युद्ध के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहा था, और उस आवाज में परिसर में शामिल लोग अपनी आवाज मिला कर एकजुटता प्रदर्शित कर रहे थे। उसमें शामिल हो रहे थे। विश्व सामाजिक मंच में शामिल सभी प्रतिनिधियों ने गाजा में हो रहे हमले में मर रहे सैनिकों के साथ-साथ बच्चों, महिलाओं की हत्या की घनघोर निंदा की, अपना विरोध प्रकट किया। परिसर में एक आवाज इज़राइल के खिलाफ गूंजने लगी थी। जो संघर्ष की एकजुटता प्रदर्शित कर रही थी।
2001 में अपनी स्थापना के बाद से ही विश्व सामाजिक मंच सामाजिक आंदोलनों, यूनियनों और कार्यकर्ताओं को एक साथ आने, अनुभव साझा करने और बदलाव के लिए रणनीति बनाने का एक मंच प्रदान करता रहा है। एक मार्गदर्शक की भूमिका अदा करता है। वर्ल्ड सोशल फोरम के कार्यक्रम इस मायने में महत्वपूर्ण होते हैं कि ये आंदोलनों की वैश्विक एकजुटता, आंदोलनों के लचीलेपन और विविधता को प्रदर्शित करते हैं। आज की विषम परिस्थिति में यह आर्थिक असमानता, जलवायु परिवर्तन, सामाजिक न्याय और लोगों के अधिकारों जैसे कई गंभीर वैश्विक मुद्दों के समाधान पर चर्चा करने के लिए एक अनूठा मंच प्रदान कर रहे है।

मेरे लिए काठमांडू में आयोजित विश्व सामाजिक मंच में शामिल होना एक विशिष्ट अनुभव रहा, जहाँ कई देशों के प्रतिनिधि एक मंच पर आए, परिवर्तनकारियों ने अपने देश में चल रहे संघर्षों से विश्व को अवगत कराया। विश्व भर में हो रहे मानवता के खिलाफ कार्यवाहियों का समवेत तरीके से विरोध प्रदर्शित किया गया, विरोध का एक स्वर बना, नव निर्माण का संकल्प लिया गया। साथी नई संभावनाओं को तलाशने को मुखर हुए।