कितना पाखंडी समाज है. अपने धर्म स्थलों के लिए इतनी संवेदना कि हर मस्जिद को खोदने और मुगल बादशाह औरंगजेब की कब्र उजाड़ने पर अमादा हैं, इस बहाने घृणा और वैमनस्य फैला कर जगह-जगह दंगे कराने में लगे हैं, वहीं आदिवासियों की कितने सरना स्थल, जाहेरथान, मसना को जमीनदोंज कर दिये, जलगग्न कर दिये, कितने आदिवासी गांव, बस्तियों को उजाड़ दिये, इसका कोई हिसाब नहीं और न इसके लिए रत्ती भर शर्मिंदगी है.

यहां गौरतलब है कि औपनिवेशिक शासन के दौरान जितनी तबाही आदिवासियों की नहीं हुई, उससे ज्यादा तबाही आजादी के बाद आदिवासी इलाकों की हुई. आंतरिक औपनिवेशिक क्षेत्र बना कर देशी हुक्मरानों ने आदिवासी क्षेत्र को बर्बाद कर दिया और कर रहे हैं. अंग्रेजों के जमाने में आदिवासियों ने जल, जंगल, जमीन को बचाने के लिए अंग्रेज हुक्मरानों से जो संघर्ष किया, उसे इतिहास के पन्नों पर ‘हूल’ और ‘उलगुलान’ के रूप में देखा जा सकता है.

उन संघर्षों की बदौलत अंग्रेज आदिवासी इलाकों के लिए विशेष भूमि कानून बनाने के लिए बाध्य हुई जिसे छोटानागपुर और संथाल परगना टिनेंसी एक्ट के रूप में हम आज देख रहे हैं. इन कानूनों के आधार पर आदिवासी जमीन का स्थानांतरण किसी अन्य समुदाय को हो ही नहीं सकता, लेकिन राष्ट्रीय विकास के नाम पर आजादी के बाद हजारों हजार एकड़ जमीन का स्थानांतरण हुआ. कही कारखाना लगा, कहीं बांध बने, कही सेंचुरी और पार्क बने और सैकड़ों गांव और गांव के साथ सरना स्थल, जाहेरथान, मसना, सासिंदरी आदि जमीनदोज हो गये या बड़े बांधों में समा गये.

पूरे देश में करीबन डेढ़ करोड़ आदिवासी विस्थापन के शिकार हुए हैं. उसमें से बमुश्किल 40 लाख लोगों को पुनर्वास मिला, लेकिन कैसा? इस संबंध में दिवंगत बुद्धिजीवी डा. रामदयाल मुंडा ने एक बार बड़े दुःख के साथ कहा था - काश! वे एक भी गांव ऐसा बना कर वापस करते जिसमें जाहेरथान, सरना स्थल, मसना आदि होता.

सिर्फ झारखंड में सुवर्णरेखा परियोजना का डूबक्षेत्र 17683 हेक्टेयर था. कोयलकारो का 17763 हेक्टेयर. फिर बोकारो, सिंदरी, एचईसी, जैसे कारखानों के लिए अर्जित हजारों हजार एकड़ जमीन. विलुप्त हो गये सैकड़ों गांव और उन गांवों के साथ आदिवासियों के सामाजिक- धार्मिक स्थलों के प्रतीक चिन्ह.

क्या हिंदुओं को ही अपने धार्मिक स्थलों से प्रेम है? आदिवासियों को अपने धार्मिक स्थलों से कोई प्रेम या सरोकार नहीं? लेकिन वे क्या करें? दंगा करें? फसाद करें?

औरंगजेब को राजनीति के लिए इस्तेमाल करने वाले यह भूल जाते हैं कि महानतम सम्राट के रूप में दर्ज अशोक ने भी औरंगजेब की ही तरह अपने भाईयों को कत्ल कर राजसत्ता हासिल की थी. कलिंग विजय के लिए हजारों लोगों को मार कर रक्त स्नान किया था. हिंदुओं के अनेक मंदिर बौद्ध मंदिर और मठों को ध्वस्त कर बनाये गये थे.

हमे याद रखना चाहिए कि इतिहास से सिर्फ सबक हासिल किया जा सकता है, उससे प्रतिशोध लेना आत्मघाती होगा और देश को सदियों पीछे ले जायेगा.